बरसात सारे शहर आई है अभी

उस की हमें वो याद लाई है अभी

नाराज़ है वो क्योंकि हम ने जो ग़ज़ल
कब के लिखी थी वो सुनाई है अभी

उस से तअल्लुक़ कम रखेंगे क्योंकि अब
मेरी इसी में ही भलाई है अभी

पहले जिसे नईं देखती थी ये नज़र
मुझ को उसी से हम-नवाई है अभी

वो क़ाफ़िया-पैमाई करता है ग़ज़ल
लिखने की* उस की इब्तिदाई है अभी

'वेदांत' उस को कॉल तुम करना नहीं
उस शख़्स का वक़्त-ए-पढ़ाई है अभी

— Vedant Trivedi

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