यूँँ मुसलसल जो उसे याद किया करते हैं
एक हक़ है जो मोहब्बत का अदा करते हैं
क्या हुआ जो उसे दिल से न निकाला हमने
ख़ैर उसके लिए पंछी तो रिहा करते हैं
कोई उम्मीद तवक़्क़ो न रही बाकी अब
ज़िंदगी काम है जीने का जिया करते हैं
होंगे वो और जो पीते हैं बहकने के लिए
हम तो बस होश में आने को पिया करते हैं
तंज सहते हैं ज़माने के सभी हँस हँस कर
हम ज़माने से कहाँ कुछ भी गिला करते हैं
दिल की बस्ती से जो गुज़रे तो ये जाना 'ज़ुहरी'
बे-वफ़ाई से भरे लोग बसा करते हैं
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