yuñ musalsal jo use yaad kiya karte hain | यूँँ मुसलसल जो उसे याद किया करते हैं

  - ALI ZUHRI

यूँँ मुसलसल जो उसे याद किया करते हैं
एक हक़ है जो मोहब्बत का अदा करते हैं

क्या हुआ जो उसे दिल से न निकाला हमने
ख़ैर उसके लिए पंछी तो रिहा करते हैं

कोई उम्मीद तवक़्क़ो न रही बाकी अब
ज़िंदगी काम है जीने का जिया करते हैं

होंगे वो और जो पीते हैं बहकने के लिए
हम तो बस होश में आने को पिया करते हैं

तंज सहते हैं ज़माने के सभी हँस हँस कर
हम ज़माने से कहाँ कुछ भी गिला करते हैं

दिल की बस्ती से जो गुज़रे तो ये जाना 'ज़ुहरी'
बे-वफ़ाई से भरे लोग बसा करते हैं

  - ALI ZUHRI

Valentine Shayari

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