ख़त्म होने को है रिश्ता अपनों में
क्या असर हो इसका देखो बच्चों में
बस कमाई नौकरी में इतनी है
अपनी ख़ुशियाँ तुम ख़रीदो क़िस्तों में
देख लो कुछ अच्छा तुम मेरे लिए
जानती हो कच्चा हूँ मैं रंगों में
घर में फिर त्योहार सा लगता है कुछ
फ़स्ल हो जब लहलहाती खेतों में
देखकर अनदेखा कर दो जिसको तुम
सूख जाता वो शजर बरसातों में
सीधे सीधे कैसे देखे तुझको हम
भारी पत्थर आते हैं इन राहों में
छोड़ो भी अब झटका उसने मेरा हाथ
दर्द होता है मुझे इन बालों में
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