khatm hone ko hai rishta apnon men | ख़त्म होने को है रिश्ता अपनों में

  - Karan Shukla

ख़त्म होने को है रिश्ता अपनों में
क्या असर हो इसका देखो बच्चों में

बस कमाई नौकरी में इतनी है
अपनी ख़ुशियाँ तुम ख़रीदो क़िस्तों में

देख लो कुछ अच्छा तुम मेरे लिए
जानती हो कच्चा हूँ मैं रंगों में

घर में फिर त्योहार सा लगता है कुछ
फ़स्ल हो जब लहलहाती खेतों में

देखकर अनदेखा कर दो जिसको तुम
सूख जाता वो शजर बरसातों में

सीधे सीधे कैसे देखे तुझको हम
भारी पत्थर आते हैं इन राहों में

छोड़ो भी अब झटका उसने मेरा हाथ
दर्द होता है मुझे इन बालों में

  - Karan Shukla

Relationship Shayari

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