जितने भी ये रस्ते हैं
रस्ते क्या हैं धोखे हैं
आँखें कितनी सच्ची हैं
आँसू कितने झूठे हैं
दाग़ हैं मेरे दामन में
दाग़ कहाँ ये धुलने हैं
इश्क़ करो तुम फिर इक बार
ज़ख़्म अगर ये भरने हैं
आओ खेलें वो ही खेल
जिस
में सब कुछ हारे हैं
सूरज तारे तुम रख लो
मुझ को जुगनू प्यारे हैं
मेरी प्यास बुझाए कौन
सारे दरिया प्यासे हैं
उस के गेसू देखो तुम
ये सावन के झूले हैं
रोना है रोऊँ कैसे
लड़के थोड़ी रोते हैं
आँसू पोंछे बोली माँ
बेटा हम सब अच्छे हैं
चेहरा कैसे दिखलाएँ
हम मैदाँ से भागे हैं
इश्क़ किया था दोनों ने
इश्क़ ने दोनों मारे हैं
— Yuvraj Singh Faujdar















