"फुटपाथ"
चल सकता नहीं जिस्म, मचलता है जज़्बात
बीते दिन यहीं बीते रात, है घर मेरा ये फुटपाथ
सुख की घटा नहीं छाती, हँसी के बादल नहीं आते
बाबा, देखो ना मेरे हिस्से में ख़ुशी के पल नहीं आते
अब हर पल इन आँखों से होती ग़मों की बरसात
बीते दिन यहीं बीते रात, है घर मेरा ये फुटपाथ
— Vikas Sangam















