"मुश्किल'
मुझ
में एक सवाल था
जो ता-उम्र मुझे मुश्किल में रखा
क्यूँ?, वो शख़्स हमारा न हो सका
उम्र भर जिसे हम ने दिल में रखा
ता-उम्र इसी सवाल ने,
हाँ मुझे मुश्किल में रखा
उस के दिल में कोई राज था
जो राज उस ने दिल में रखा
बात ही बात में क्या बात आज हो गई?
जो उस ने दिल की बात भरी महफ़िल में रखा
ता-उम्र इसी सवाल ने,
हाँ मुझे मुश्किल में रखा
ढूँढो उसे कि हाँ गया
लम्हा मेरा कहाँ गया
जिसे चुरा के ज़माने से
हम ने राह-ए-मंज़िल में रखा
ता-उम्र इसी सवाल ने,
हाँ मुझे मुश्किल में रखा
— Vikas Sangam















