'मुसलसल मौत'

मौत कब आती है?
मौत आती है जब
एक माँ
अपनी बिटिया को
किसी अजनबी के दर पर
छोड़ आती है
क्योंकि समाज को लड़कियाँ क़ुबूल नहीं
और महिला के हिस्से का प्यार, पालन-पोषण
उस घर के लिए श्राप है

मौत आती है जब
एक बच्चा
अपने ही हाथों से
अपना बचपन सडक पर बेच रहा दिखाई दे
क्योंकि जीवन ने उसे मजबूरियों ख़ातिर
पहले ही बड़ा कर दिया
अपने निवालों की तिजारत करने

मौत आती है जब
एक किसान
अपने ही फ़ल और सब्ज़ीयों का
हक़दार नहीं हो पाता
उस की मेहनत, उस की निष्ठा
उस का सम्पूर्ण जीवन
जैसे औरों के सेवा में
व्यर्थ होने लिख़ा गया हो

मौत आती है जब
एक प्रेमी
अपने प्रेमिका से कहता है
कि वो उस के लाइक़ नहीं
क्योंकि हलकी जेबों ने
उस के प्यार को भी हल्का कर दिया
के जात-पात एवं भरी तिजोरियां
सर्वप्रथम स्थल पर अनिवार्य है

मौत आती है जब
एक मनुष्य
अपनी लाचारी पर
अब रो भी नहीं सकता
क्योंकि वो बहते अश्कों सा है
जो कड़कती परेशानियों के धूप में
अब पत्थर हो चला है
और पत्थर किसी को उम्मीद नहीं देता
स्वयं को भी नहीं

मौत आती है जब
एक लेखक
सम्पूर्ण विश्व की घटनाएं
कविताओं में व्यक्त कर देता है
परंतु अपनी परेशानियाँ लिख़ते वक़्त
उस की क़लम मौन धारण कर लेती है
भीतर भिकरी स्याही किताबों पर
एक छोटा निशान तक नहीं छोड़ पाती

बेशक मौत साँसों के पश्चात आती हो
मगर मनुष्य साँस लेते समय
मुसलसल ही मौत के अनेक रूप देख
ख़ौफ़ से ही मरता रहता है

तो आप कितनी बार मर चुके हैं इस जीवन में?

— Zain Aalamgir

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