“भूख और रोटी”
इस पिस्तौल को
कफ़न पहनाकर
जलते अलाव में डालकर
अब चलूॅंगा
ढाबे से
पनीर की कोई सब्ज़ी
दाल फ़्राई
और ढेर सारी रोटियाँ ले कर
कहीं रुकूॅंगा
क्यूँ मारा
एक अपरिचित इंसान को
सिर्फ़ चंद रुपयों की ख़ातिर
अब नहीं सोचूॅंगा
एक भूखे इंसान के लिए
रोटी कितनी ज़रूरी है
जब भूख और रोटी में हो
विलोमानुपात
मैं किसी को नहीं बताऊॅंगा
— Aatish Indori















