“कोशिश”
मैं लिख रहा हूँ
अच्छा या बुरा ये सोचे बिना
वरना लिख नहीं पाऊँगा
और रह जाएगी ख़ाली काग़ज़ की सफ़ेदी
मुझे ये विश्वास है
वक़्त की पुरानी छन्नी
धीरे-धीरे छानती जाएगी
और कविता बच जाएगी
— Aatish Indori
मैं लिख रहा हूँ
अच्छा या बुरा ये सोचे बिना
वरना लिख नहीं पाऊँगा
और रह जाएगी ख़ाली काग़ज़ की सफ़ेदी
मुझे ये विश्वास है
वक़्त की पुरानी छन्नी
धीरे-धीरे छानती जाएगी
और कविता बच जाएगी
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