एक आईना रू-ब-रू है अभी
उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी
वही ख़ाना-ब-दोश उम्मीदें
वही बे-सब्र दिल की ख़ू है अभी
दिल के गुंजान रास्तों पे कहीं
तेरी आवाज़ और तू है अभी
ज़िंदगी की तरह ख़िराज-तलब
कोई दरमाँदा आरज़ू है अभी
बोलते हैं दिलों के सन्नाटे
शोर सा ये जो चार-सू है अभी
ज़र्द पत्तों को ले गई है हवा
शाख़ में शिद्दत-ए-नुमू है अभी
— Ada Jafarey














