मैं तुझ सेे मिलने अगर तेरे घर कभी जो आऊॅं तो क्या करेगा

भुला के सारी बला की बातें मिलाएगा रुख़ वफ़ा करेगा

तेरी सगाई के सारे ग़म तो मैं जैसे तैसे निगल गया हूँ
मगर मैं तब क्या करूँॅंगा जब तू गले लगाकर जुदा करेगा

है क्या अज़िय्यत है कैसा मंज़र ये कैसी मुश्किल घड़ी है आई
तुम्हारी बाहों में रहने वाला तुम्हारे बिन अब रहा करेगा

हमारे हक़ में तो तुम थे गोया जो बदनसीबी से छिन चुके हो
ये दिल तुम्हारा मुरीद है सो तुम्हारे हक़ में दुआ करेगा

मेरे कलेजे में रहने वाले तुझे ये शादी बहुत मुबारक
ख़ुशी है मुझ को मगर ये दुख भी कोई तुझे अब छुआ करेगा

मैं अपने कूचे में मुतमइन हूँ तू अपनी गलियों में ख़ुश रहा कर
हमारी क़िस्मत में क्या लिखा है ये फ़ैसला तो ख़ुदा करेगा

बहुत मुहब्बत भी कर ली हम ने बहुत ख़सारा भी कर लिया है
चलो पुरानी हुई मुहब्बत 'अदेश' अब कुछ नया करेगा

— Adesh Rathore

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