tumhaari be-vafaaii ne ha | तुम्हारी बे-वफ़ाई ने हमें तो मार डाला है

  - Afzal Sultanpuri

तुम्हारी बे-वफ़ाई ने हमें तो मार डाला है
हमें मालूम थोड़ी था कि हमने साँप पाला है

मोहब्बत जन्म लेती है बिना मज़हब को देखे ही
ख़ुदा भी आज़माता है करम उसका निराला है

ग़ज़ब तस्वीर है इस
में किसी ने जान डाली है
'अजब सा नूर है इस
में जहाँ में बोलबाला है

अरब से आ रहे दरवेश ये बातें बताते हैं
मदीने में उजाला है मदीने में उजाला है

चलो उस ओर चलते हैं जिधर दरवेश रहते हैं
वहीं आक़ा हमारे हैं वहीं मेराज़ वाला है

चलो उस शहर में रहने वहाँ रहमत बरसती है
वहीं पर भीख माँगेंगे वहीं पर देने वाला है

  - Afzal Sultanpuri

Lab Shayari

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