doobne waale ko tinke ka sahaara de de | डूबने वाले को तिनके का सहारा दे दे

  - Faiz Ahmad

डूबने वाले को तिनके का सहारा दे दे
हो सके तो मुझे भी एक किनारा दे दे

लौट आऊँगा तिरी सम्त को तौबा करने
ऐ मिरे रब मुझे वो शख़्स दोबारा दे दे

किसी सूरत नहीं चल पा रहा हूँ लेके तुझे
ज़िन्दगी मौत के काँधों का सहारा दे दे

बैठा हूँ अब भी तिरी राह में उलफ़त को लिए
खु़दा मुझ से तुझे वो 'इश्क़ दोबारा दे दे

दिल को आ जाए मिरे चैन तिरे आने का
कम से कम राहत-ए-जाँ कोई इशारा दे दे

एक मुद्दत से तिरी जुस्तुजू में हूँ मसरूफ
मेरी इस वस्ल की कश्ती को किनारा दे दे

  - Faiz Ahmad

Sarhad Shayari

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