अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

तुझे माशूक़ बनना है तो पूरी शान पैदा कर

कहाँ का वस्ल कैसी आरज़ू ऐ दिल वो कहते हैं
न मैं हसरत करूँ पूरी न तू अरमान पैदा कर

हमारा इंतिख़ाब अच्छा नहीं ऐ दिल तो फिर तू ही
ख़याल-ए-यार से बेहतर कोई मेहमान पैदा कर

मुझे है रश्क उस को भी रक़ीब अपना समझता हूँ
न देखे जो तुझे ऐसा कोई दरबान पैदा कर

ख़याल-ए-ज़ब्त-ए-उल्फ़त है तो 'अहसन' फिर ख़तर कैसा
न धड़के दिल भी सीने में वो इत्मीनान पैदा कर

— Ahsan Marahravi

More by Ahsan Marahravi

Other ghazal from the same pen

See all from Ahsan Marahravi →

Andaaz Shayari

Shers of andaaz.

All Andaaz Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling