chaaragar ne khel ulta kar diya | चारागर ने खेल उल्टा कर दिया

  - Aisha Ayyub

चारागर ने खेल उल्टा कर दिया
इक पुराना ज़ख़्म गहरा कर दिया

उस ने भी पूछा नहीं फिर क्या हुआ
मुख़्तसर हम ने भी क़िस्सा कर दिया

ज़हरस लबरेज़ इस माहौल ने
आँसुओं का रंग नीला कर दिया

अब हमें रोने की आज़ादी मिली
क़हक़हों ने काम आधा कर दिया

आइने में भी नज़र आता है तू
क्या मुझे भी अपने जैसा कर दिया

देख मुर्शिद ने तिरे बीमार को
क़ुल हुवल्लह पढ़ के अच्छा कर दिया

क्या ग़ज़ब की है तिरी कूज़ा-गरी
कैसे कैसों को ही कैसा कर दिया

जिस की लौ से जल गया मेरा मकाँ
उस दिए ने तो अंधेरा कर दिया

मैं तो एक इंसान हूँ मजबूर हूँ
तू ख़ुदा है तू ने ये क्या कर दिया

  - Aisha Ayyub

Andhera Shayari

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