मुस्कुराने को मुसव्विर ने कहा

मैं ने कोशिश की नहीं मुझ से हुआ

रेज़ा रेज़ा कर दिया तुम ने मुझे
मेरे मलबे में बताओ क्या मिला

लफ़्ज़ चेहरे पर नुमू होने लगे
मेरी चुप ने काम अपना कर दिया

तेरी ख़ुशबू हर तरफ़ महसूस की
एक ऐसा फूल फ़ुर्क़त में खिला

देखना है आज तुझ को ग़ौर से
हट ज़रा पीछे ज़रा सा दूर जा

वो रहा ख़ामोश मेरी बात पर
काम उस ने साफ़-गोई से लिया

ख़ूब-सूरत मोड़ पर बिछ्ड़ें गे हम
फ़ैसला दोनों ने मिल कर ये किया

— Aisha Ayyub

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