इस ज़िंदगी में आप से बेहतर नहीं बना

सोना बना मगर कभी जेवर नहीं बना

बनता रहा जो आज अभी तक जहान में
अंदर से आज तक मैं वो पत्थर नहीं बना

मैं बद-दु'आ तुझे दे सकूँ,चाह है मगर
मुझ से कभी वो एक भी अक्षर नहीं बना

मेरी तमाम उम्र तिरी खोज में कटी
लेकिन मैं बुद्ध का-सा कलंदर नहीं बना

हम जीना सीखते भी कहाँ ज़ीस्त के सिवा
इस के लिए कहीं भी थिएटर नहीं बना

— Ajit Yadav

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Anjam Shayari

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