ba'ad suraj ke bhi ham ko zindagi achchhii lagii | बा'द सूरज के भी हम को ज़िंदगी अच्छी लगी

  - Aleena Itrat

बा'द सूरज के भी हम को ज़िंदगी अच्छी लगी
शब की फ़ितरत में थी जो इक बेकली अच्छी लगी

पहले पहले कुछ हिरासाँ से थे हम तन्हाई से
चाँद तारे आ गए फिर ख़ामुशी अच्छी लगी

बंदिशों को तोड़ने की कोशिशें करती हुई
सर पटकती लहर तेरी आजिज़ी अच्छी लगी

रात भर शबनम के हाथों बन-सँवर जाने के बा'द
फूल के चेहरे पे बिखरी ताज़गी अच्छी लगी

उस के शे'रों में मोहब्बत के सिवा कुछ भी न था
पर 'अलीना' को यही दीवानगी अच्छी लगी

  - Aleena Itrat

Neend Shayari

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