lo aftaab ne sab khatm ikhtilaaf kiya | लो आफ़्ताब ने सब ख़त्म इख़्तिलाफ़ किया

  - Aleena Itrat

लो आफ़्ताब ने सब ख़त्म इख़्तिलाफ़ किया
धुआँ धुआँ थे जो मंज़र सभी को साफ़ किया

शफ़क़ का लाल दुपट्टा ओढ़ा के वादी को
वजूद-ए-इश्क़ का सूरज ने ए'तिराफ़ किया

किसी ख़याल में ग़र्क़ाब गर्म साँसों ने
दबी हुई किसी हसरत का इंकिशाफ़ किया

इक आबशार की शफ़्फ़ाफ़ नर्म हलचल ने
कमाल कर दिया संग-ए-बदन शिगाफ़ किया

कि बाज़गश्त तो जारी है इन घटाओं की
प बारिशों ने कहाँ जा के एतकाफ़ किया

घटा ने चाँद का घूँघट सँवारने के लिए
हिसार-ए-नूर में सौ मर्तबा तवाफ़ किया

तुम्हारे ख़ौफ़ से हम मुँह छुपाए फिरते हैं
ये रौशनी से अँधेरों ने ए'तिराफ़ किया

  - Aleena Itrat

Raushni Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aleena Itrat

As you were reading Shayari by Aleena Itrat

Similar Writers

our suggestion based on Aleena Itrat

Similar Moods

As you were reading Raushni Shayari Shayari