baat muqaddar ki hai saari waqt ka likkha maarta hai | बात मुकद्दर की है सारी वक़्त का लिक्खा मारता है

  - Ali Zaryoun

बात मुकद्दर की है सारी वक़्त का लिक्खा मारता है
कुछ सजदों में मर जाते हैं कुछ को सजदा मारता है

सिर्फ हम ही हैं जो तुझ पर पूरे के पूरे मरते हैं
वरना किसी को तेरी आँखें, किसी को लहज़ा मारता है

दिलवाले एक दूजे की इमदाद को ख़ुद मर जाते हैं
दुनियादार को जब भी मारे दुनियावाला मारता है

शहर में एक नए कातिल के हुस्न-ए-सुखन के बलवे हैं
उससे बच के रहना शे'र सुना के बंदा मारता है

  - Ali Zaryoun

Shehar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ali Zaryoun

As you were reading Shayari by Ali Zaryoun

Similar Writers

our suggestion based on Ali Zaryoun

Similar Moods

As you were reading Shehar Shayari Shayari