Ambar
Ambar
Nazm

इशारतें

इशारों में हम ने जो बातें कही थी
न समझे न जाने वो दिल की लगी थी

बिछड़ना हुआ यूँ कि कह भी न पाया
मिरी ज़िंदगी तो तुम्हीं में बसी थी

मुलाक़ात को हम तरसते रहेंगे
ये अरमाँ के बादल बरसते रहेंगे

नमी भर के आँखों में जीते रहेंगे
जवानी के ज़ख़्मों को सीते रहेंगे

मिरे दिल से निकलेगी बस ये सदाएंँ
तिरे हिस्से की सारी ले लूँ बलाएंँ

हुए दूर हम क्योंकि तेरी ख़ुशी थी
मुहब्बत हमारी तो बस भूल ही थी

इशारों में हम ने जो बातें कही थी
न समझे न जाने वो दिल की लगी थी

— Ambar

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