jang jaari hai khaandaanon mein | जंग जारी है ख़ानदानों में

  - Ameer Qazalbash

जंग जारी है ख़ानदानों में
ग़ैर महफ़ूज़ हूँ मकानों में

लफ़्ज़ पथरा गए हैं होंटों पर
लोग क्या कह गए हैं कानों में

रात घर में थी सर-फिरी आँधी
सिर्फ़ काँटे हैं फूलदानों में

माबदों की ख़बर नहीं मुझ को
ख़ैरियत है शराब-ख़ानों में

अब सिपर ढूँड कोई अपने लिए
तीर कम रह गए कमानों में

नाख़ुदा क्या ख़ुदा रखे महफ़ूज़
वो हवाएँ हैं बादबानों में

दाल चुनने में हाथ आएँगे
जितने कंकर हैं कार-ख़ानों में

ढूँडता फिर रहा हूँ ख़ाली हाथ
जाने क्या चीज़ उन दुकानों में

  - Ameer Qazalbash

Teer Shayari

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    वो बे-ख़बर है ख़बर में रहे तो अच्छा है

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