इक कहानी नई हर बार बना देता है
उस से कुछ पूछो वो कुछ और बता देता है
ख़त्म हो जाती है बीमारी भी जैसे तैसे
डॉक्टर फिर दवा का रोग लगा देता है
सोचो क्या सोच के काग़ज़ की बनी कश्ती को
कोई बारिश हो तो पानी में बहा देता है
प्यार में तेरे मिरा फ़ोन भी है पागल मैं
लव यूँ लिखता हूँ तिरा नाम बता देता है
हम को इक उम्र लगी थी तो पता चल पाया
क्यूँ कोई दिल बना के तीर लगा देता है
— Amit Kumar















