उन के वा'दों का हाल क्या कहिए

हफ़्ता-ओ-माह-ओ-साल क्या कहिए

आरज़ू-ए-विसाल क्या कहिए
ज़ेहन का इंतिक़ाल क्या कहिए

हुस्न को मैं ख़ुदा समझता हूँ
हाए मेरा ख़याल क्या कहिए

वही सुब्ह-ओ-मसा वही शब-ओ-रोज़
ज़िंदगी है वबाल क्या कहिए

उन से कोई जवाब बन न पड़ा
मेरा तर्ज़-ए-सवाल क्या कहिए

सिसकियाँ इक मरीज़-ए-ग़म की हाए
आप की देख-भाल क्या कहिए

आप के लुत्फ़ में सितम पिन्हाँ
हो गए हम निहाल क्या कहिए

आगे बस और क्या है नाम-ए-ख़ुदा
आप हैं बे-मिसाल क्या कहिए

आरज़ूओं का हसरतों का लहू
ज़िंदगी का मआल क्या कहिए

— Amjad Najmi

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