जाओ मातम गुज़ारो जाने दो जिस का ग़म है उसे मनाने दोबीच से एक दास्ताँ टूटीऔर फिर बन गए फ़साने दोहम फ़क़ीरों को कुछ तो दो साहबकुछ नहीं दे सको तो ता'ने दोहाथ जिस को लगा नहीं सकताउस को आवाज़ तो लगाने दोतुम दिया हो तो उन पतंगों कोकम से कम रौशनी में आने दो— Ammar Iqbal