जिसे देखूँ वही बेहतर रिवाजों का नहीं लगता
यहाँ हर शख़्स मेरे तो मिज़ाजों का नहीं लगता
दवा मैं माँगता कुछ हूँ मुझे कुछ और देता है
वो चारागर मुझे बिल्कुल इलाजों का नहीं लगता
हुकूमत करने वाला ही जहाँ भगवान बन जाए
समझ लो फिर वहाँ कोई समाजों का नहीं लगता
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