dard gham aur KHushi ghazal ki hai | दर्द ग़म और ख़ुशी ग़ज़ल की है

  - A R Sahil "Aleeg"

दर्द ग़म और ख़ुशी ग़ज़ल की है
शे'र और शाइरी ग़ज़ल की है

जितनी भी नाज़ुकी ग़ज़ल की है
बस यही बेबसी ग़ज़ल की है
'इश्क़, ग़म, वस्ल, हिज्र, टीस, कसक
गुफ्तगू सब यही गज़ल की है

इक गज़ाला है मेरे ख़्वाबों में
जिस के सर ओढ़नी ग़ज़ल की है

जितने शाइर हैं तेरी दुनिया में
सब के सर आशिकी ग़ज़ल की है

कह रही है, चले भी आओ तुम
सुन सदा ये मेरी ग़ज़ल की है

देख ले इक तेरे न होने से
कितनी सूनी गली ग़ज़ल की है

ख़ुश न हो ए हवा बुझा के चराग़
हम पे कुछ रौशनी ग़ज़ल की है

सिर्फ़ और सिर्फ़ मांगती है खूँ
क्या 'अजब तिश्नगी ग़ज़ल की है

इस में ही 'उम्र काट दी हमने
ये ही जो झोंपड़ी ग़ज़ल की है

मैं सुखाता हूँ इस पे कुछ मिसरे
दिल में जो अलगनी ग़ज़ल की है

आज हैं ज़ेहनो-दिल मेरे रौशन
आज फिर चाँदनी ग़ज़ल की है

चाँदनी शब, सबा, गज़ाला, मैं
ये कहानी किसी ग़ज़ल की है

शे'र साहिल ये आख़िरी है और
दर्द ये आख़िरी ग़ज़ल की है

  - A R Sahil "Aleeg"

Udasi Shayari

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