doob kar meri mar gaii aankhen | डूब कर मेरी मर गई आँखें

  - Aves Sayyad

डूब कर मेरी मर गई आँखें
देखी जब वो शनावरी आँखें

इक सफ़र सात आसमानों का
इक ज़मीं पर मुसाफ़िरी आँखें

अब तलक मेरी रूह अंदर है
कोई खोले वज़ाइफ़ी आँखें

झील पर नाचता हुआ इक मोर
उस पे तेरी झुकी हुई आँखें

मीर ने भी सुनी ग़ज़ल उस सेे
जब खुली उसकी मसनवी आँखें

ये सितारे फरिश्तों का ये नूर
लेकिन उस नाज़रीन की आँखें

तेरी आँखों पे ये घनी ज़ुल्फें
तेरी ज़ुल्फों पे ये मेरी आँखें

मेरी बातें बहुत घुमाती हैं
काश होती पढ़ी लिखी आँखें

कौन ग़म-ख़्वार है तेरा सय्यद
किसी ने देखी है तेरी आँखें

  - Aves Sayyad

Chehra Shayari

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