mujhse kuchh yuñ lipt gaya hai ishqjaise is jism ki qaba hai ''ishq | मुझ सेे कुछ यूँँ लिपट गया है ''इश्क़

  - Aves Sayyad

मुझ सेे कुछ यूँँ लिपट गया है ''इश्क़
जैसे इस जिस्म की क़बा है ''इश्क़

अब कहानी में सुनते है बस इसे
कितनी सदियों से लापता है ''इश्क़

कौन अब तेरी आरजू में जिए
दिल की क़ब्रों में सो गया है ''इश्क़

क्यूँ कसे फतवे 'इश्क़ पर कोई
अपना अपना ही तजरबा है ''इश्क़

कैस ओ राँझा के खून से रंगा
दुनिया में एक मुद्दआ है ''इश्क़

दिल पे रक्खा ये भारी पत्थर है
न ही बंदा न ही ख़ुदा है ''इश्क़

है नसीहत बुजुर्गों की ये हमें
जान का रोग है बला है ''इश्क़

फ़ित्ना ही फ़ित्ना है फ़क़त सय्यद
कोई तोहफ़ा न मोजज़ा है 'इश्क़

  - Aves Sayyad

Dil Shayari

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