dil ka sukoon aankh ka taara kise kahein | दिल का सुकून आँख का तारा किसे कहें

  - Bakhtiyar Ziya

दिल का सुकून आँख का तारा किसे कहें
ये सोचना पड़ा है कि अपना किसे कहें

ये शोर-ए-इंक़लाब ये नाक़ूस ये अज़ाँ
हंगामा कौन सा है तमाशा किसे कहें

रहबानियत का जिस्म से फ़सताइयत की रूह
किस को रफ़ीक़ ख़ून का प्यासा किसे कहें

सब मिलते-जुलते चेहरे हैं दुश्मन भी दोस्त भी
क़ातिल किसे बताएँ मसीहा किसे कहें

हर ज़र्रा-ए-हक़ीर है हम-दोश मेहर-ओ-माह
इस पत्थरों के ढेर में हीरा किसे कहें

इतना शुऊ'र दे हमें ख़ल्लाक़ ख़ैर-ओ-शर
ख़ार-अो-ज़बूँ है कौन फ़रिश्ता किसे कहें

मिलना था जो नसीब से वो मिल गया 'ज़िया'
हसरत किसे बताएँ तमन्ना किसे कहें

  - Bakhtiyar Ziya

Visaal Shayari

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