आओ गुज़रे ज़माने की बातें करें
बारिशों में नहाने की बातें करें
नाव काग़ज़ की बैठे बनाते रहें
और सैलाब आने की बातें करें
उस ख़यालों के रंगीं नगर से कभी
लौट कर फिर न आने की बातें करें
रात बिस्तर में तकिए से सर को दबा
आँसुओं को छुपाने की बातें करें
कुछ न कुछ तो रही वजह बिछड़े जो हम
उसको अब भूल जाने की बातें करें
भूल जाओ 'बशर' मिल नहीं पाए हम
बस अधूरे फ़साने की बातें करें
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