मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए

कोई ख़ुशबू मैं लगाऊंतिरी ख़ुशबू आए

वक़्त-ए-रुख़्सत कहीं तारे कहीं जुगनू आए
हार पहनाने मुझे फूल से बाज़ू आए

मैं ने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ माँगी थी
कोई आहट न हो दर पर मिरे जब तू आए

इन दिनों आप का आलम भी अजब आलम है
तीर खाया हुआ जैसे कोई आहू आए

उस की बातें कि गुल-ओ-लाला पे शबनम बरसे
सब को अपनाने का उस शोख़ को जादू आए

उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बा'द मिरी आँखों में आँसू आए

— Bashir Badr

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Ibaadat Shayari

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