जिन दिनों ग़म ज़ियादा होता हैआँख में नम ज़ियादा होता हैदर्द दिल का भी कोई ठीक नहींख़ुद-ब-ख़ुद कम ज़ियादा होता हैकुछ तो हस्सास हम ज़ियादा हैंकुछ वो बरहम ज़ियादा होता हैसब से पहले उन्हें झुकाते हैंजिन में दम-ख़म ज़ियादा होता हैक़ैस पर ज़ुल्म तो हुआ 'बासिर'फिर भी मातम ज़ियादा होता है— Basir Sultan Kazmi