hangaama-e-khu | हंगामा-ए-ख़ुदी से तू बे-नियाज़ हो जा

  - Ehsan Danish

हंगामा-ए-ख़ुदी से तू बे-नियाज़ हो जा
गुम हो के बे-ख़ुदी में आगाह-ए-राज़ हो जा

हद भी तो चाहिए कुछ बे-ए'तिनाइयों की
ग़ारत-गर-ए-तहम्मुल तस्कीं-नवाज़ हो जा

ऐ सरमदी तराने हर शय में सोज़ भर दे
ये किस ने कह दिया है पाबंद-ए-साज़ हो जा

ग़ैरत की चिलमनों से आवाज़ आ रही है
महव-ए-नियाज़-मंदी आ बे-नियाज़ हो जा

आ मिल के फिर बनाएँ मय-ख़ाना-ए-मोहब्बत
मैं जुरआ-कश बनूँ तू पैमाना-साज़ हो जा

सीने में सोज़ बन कर कब तक छुपा रहेगा
उनवान-ए-राज़दारी तफ़्सील-ए-राज़ हो जा

अब सो चुकी उम्मीदें अब थक चुकीं निगाहें
जान-ए-नियाज़-मंदी मसरूफ़-ए-नाज़ हो जा

सोज़-ए-नज़र से छल्कें नग़्मात-ए-राज़-ए-हस्ती
ऐ उक़्दा-ए-तग़ाफ़ुल रूदाद-ए-नाज़ हो जा

'एहसान' काश उट्ठें ये रंग-ओ-बू के पर्दे
ऐ महफ़िल-ए-हक़ीक़त बज़्म-ए-मजाज़ हो जा

  - Ehsan Danish

Protest Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ehsan Danish

As you were reading Shayari by Ehsan Danish

Similar Writers

our suggestion based on Ehsan Danish

Similar Moods

As you were reading Protest Shayari Shayari