हमें ये राज़ सभी को बताना होता है
नए के बा'द ही कोई पुराना होता है
बिला जवाज़ नहीं बोलता हूँ देर तलक
कि मैं ने बात को आगे बढ़ाना होता है
किसी को तोहफ़े में दे दी है युसूफ़ी की किताब
कि हम को कौन सा अब मुस्कुराना होता है
पुराने फ़रमाँ-रवा छोड़ते नहीं कुछ भी
नए जब आए तो ख़ाली ख़ज़ाना होता है
— Ejaz Tawakkal Khan















