दिल जब ख़ाली हो जाता है
और भी भारी हो जाता है
जब तू साक़ी हो जाता है
इश्क़ शराबी हो जाता है
मैं जब तक कुछ तय करता हूँ
सब कुछ माज़ी हो जाता है
उस के छूते ही क़िस्मत का
ताला चाभी हो जाता है
पहले तू काफ़ी होता था
अब नाकाफ़ी हो जाता है
— Fahmi Badayuni
और भी भारी हो जाता है
जब तू साक़ी हो जाता है
इश्क़ शराबी हो जाता है
मैं जब तक कुछ तय करता हूँ
सब कुछ माज़ी हो जाता है
उस के छूते ही क़िस्मत का
ताला चाभी हो जाता है
पहले तू काफ़ी होता था
अब नाकाफ़ी हो जाता है
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