इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है
सहर सिसकते हुए आसमान से उतरी
तो दिल ने जान लिया ये भी साल दर्द का है
ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में
मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है
अब इसके बाद कोई राब्ता नहीं रखना
ये बात तय हुई लेकिन सवाल दर्द का है
ये दिल ये उजड़ी हुई चश्म-ए-नम ये तन्हाई
हमारे पास तो जो भी है माल दर्द का है
न तुम में सुख की कोई बात है न मुझ में है
तुम्हारा और मेरा मिलना विसाल दर्द का है
किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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