हमारे दिल को हम समझा रहे हैं
ख़ुशी के बा'द दुख भी आ रहे हैं
हमें हैरत नहीं काली ज़बाँ है
वो आए हैं वो वापस जा रहे हैं
मोहब्बत से हमें बस ये गिला है
बिछड़ते वक़्त हम ज़िंदा रहे हैं
रकीबों से ख़बर झूठी मिली है
हमारे बा'द वो पछता रहे हैं
मिले क़िस्मत से है तो ध्यान रख ले
वगरना किस पे हम आसाँ रहे हैं
कोई पूछे के थे तेरे दीवाने?
मैं कह दूँगा यही जी हाँ रहे हैं
ख़तों के साथ दिल आया नहीं हैं
सुना तो था वो सब लौटा रहे हैं
— Gagan Bajad 'Aafat'















