tumhein khabar bhi hai ye tum ne kis se kya maanga | तुम्हें ख़बर भी है ये तुम ने किस से क्या माँगा

  - Ghani Ejaz

तुम्हें ख़बर भी है ये तुम ने किस से क्या माँगा
भँवर में डूबने वालों से आसरा माँगा

सुने जो मेरे अज़ाएम तो आज़माने को
हवा से बर्क़ ने घर का मिरे पता माँगा

ख़ुद अपनी राह बनाता गया पहाड़ों में
कभी कहाँ किसी दरिया ने रास्ता माँगा

जो आप अपने अंधेरों से बद-हवा से हुई
शब-ए-सियाह ने घबरा के इक दिया माँगा

कहीं भी हो कोई नेकी बराए नेकी हो
वहीं पे हो गई ज़ाएअ' अगर सिला माँगा

ख़ुदा की देन के मोहताज-ए-बंदगान-ए-ख़ुदा
ये क्या कि माँगने वालों से जा-ब-जा माँगा

हमें जो 'इश्क़ में होना था सुर्ख़-रू 'एजाज़'
तो हम ने जान-ए-हज़ीं क़ल्ब-ए-मुब्तला माँगा

  - Ghani Ejaz

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