बेगम से कहा हम ने जो फ़ुर्सत है आप को

पतलून में हमारी बटन एक टाँक दो

ग़ुस्से से बोलीं आप ही ख़ुद टाँक लें जनाब
बीवी का जब मज़ाक़ उड़ाते रहे हैं आप

बीवी बग़ैर आदमी होते नहीं पूरे
मैं न रहूँ तो आप भी रह जाएँ अधूरे

यूँ तो बटन का टाँकना छोटा सा काम है
ये काम भी तो लाएक़-ए-सद-एहतिराम है

मर्दांगी की शान न इतनी बघारिए
सूई में सिर्फ़ धागा पिरो कर दिखाए

पतलून में जो आप बटन ख़ुद लगाएँगे
उँगली चुभो के सूई में ख़ूँ में नहाएँगे

सोचो बटन बग़ैर जो पतलून पहनते
पतलून फिसलती तो क्या सब लोग न हँसते

पतलून में तुम्हारी बटन कौन टाँकती
दुनिया में तुम बताओ जो औरत ही न होती

हम ने कहा कि अपनी बड़ाई न हाँकिए
छोटी सी है ये बात न आगे बढ़ाइए

पतलून में बस एक बटन टाँकने का था
पतलून को बटन में नहीं टाँकने का था

ग़ुस्से को थूक दीजे मेरी बात मानिए
खाई में यूँ बहस की ख़ुदारा न झाँकिए

गर इस बहस का ख़ात्मा होना ज़रूर है
जो बात सच है आप को सुनना ज़रूर है

औरत अगर न होती तो जन्नत ही में रहते
दुनिया में आ के इस तरह दुख-दर्द न सहते

शादी ब्याह का हमें ख़तरा भी न होता
सिर्फ़ इक बटन को टाँकने का नख़रा भी न होता

बीवी या उस की बहन हो या हो किसी की सास
तुम हो इसी लिए तो पहनते हैं हम लिबास

मर्दों को अगर दुनिया में औरत ही न होती
पतलून पहनने की ज़रूरत ही न होती

— Ghaus Khah makhah Hyderabadi

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