vasl aasaan hai kya mushkil hai | वस्ल आसान है क्या मुश्किल है

  - Hafeez Jaunpuri

वस्ल आसान है क्या मुश्किल है
तुझ को ये ध्यान है क्या मुश्किल है

वज़्अ का ध्यान है क्या मुश्किल है
दोस्त नादान है क्या मुश्किल है

होंट पर जान है क्या मुश्किल है
मुश्किल आसान है क्या मुश्किल है

हाए दीवाना बना कर कहना
फिर भी इक शान है क्या मुश्किल है

अब जगह चाहिए वहशत को मिरी
तंग मैदान है क्या मुश्किल है

जिस को मर मिट के मिटाया था अभी
फिर वही ध्यान है क्या मुश्किल है

बे-बुलाए कहीं जाने के नहीं
आ पड़ी आन है क्या मुश्किल है

हम न उठते हैं न वो देते हैं
हाथ में पान है क्या मुश्किल है

हम को समझाए समझ नासेह की
फिर ये एहसान है क्या मुश्किल है

मेरे बद-अहद को अल्लाह रखे
मौत आसान है क्या मुश्किल है

उस ने रक्खा है वो दरबाँ जिस से
जान-पहचान है क्या मुश्किल है

शैख़ करता है बुतों की ग़ीबत
फिर मुसलमान है क्या मुश्किल है

हुस्न पर ख़ल्क़ मिटी जाती है
जो है क़ुर्बान है क्या मुश्किल है

हिज्र में जान निकलती नहीं आह
ये भी अरमान है क्या मुश्किल है

बंदगी बुत की ख़ुदा के बंदे
कुफ़्र ईमान है क्या मुश्किल है

चारागर को है मिरे फ़िक्र-ए-दवा
दर्द ही जान है क्या मुश्किल है

बज़्म में ज़हर उगलने को अदू
दर पे दरबान है क्या मुश्किल है

यूँँ तो पहले भी मोहब्बत थी 'हफ़ीज़'
अब तो ईमान है क्या मुश्किल है

  - Hafeez Jaunpuri

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