ऐसा नहीं कि मुझको मोहब्बत हुई नहीं
ये और बात जिससे हुई वो मिली नहीं
हर शख़्स छूना चाहता है सिर्फ़ जिस्म को
ला'नत है उसकी रूह किसी ने छुई नहीं
वो शादी तो करेगी मगर एक शर्त पर
हम हिज्र में रहेंगे अगर नौकरी नहीं
वो साथ थी तो ज़िंदगी जन्नत सी थी मिरी
अब जी रहा हूँ मैं जिसे वो ज़िंदगी नहीं
अपने ग़मों को शाइरी से हल्का करते हैं
हर कोई ख़ुदकुशी करे ये लाज़िमी नहीं
कितना ज़ियादा दर्द है हम टूटे लोगों में
ग़ज़लें हमारी याँ पे किसी से छुपी नहीं
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