ik din fuzool jaayega saara likkha meraa | इक दिन फ़ुज़ूल जाएगा सारा लिक्खा मेरा

  - Harsh saxena

इक दिन फ़ुज़ूल जाएगा सारा लिक्खा मेरा
राहों में काम आएगा बस तजुर्बा मेरा

मैं तुमसे कितनी भी शिद्दत से करूँँ मोहब्बत
आख़िर अधूरा रह ही जाना है क़िस्सा मेरा

तुमको अभी कहाँ अंदाज़ा मेरे हुनर का
जानाँ तभी लगाते हो दाम सस्ता मेरा

तुमसे बिछड़ के भी चाहत कम न हो सकी ये
सोचो तुम्हें पा कर के क्या हाल होता मेरा

वो लेटा है किसी की आग़ोश में सुकूँ से
कमबख़्त ये फ़क़त हो नज़रों का धोका मेरा

इक शख़्स ने मुझे अपने दिल से क्या निकाला
महफ़िल में बढ़ गया अशआरों का दर्जा मेरा

मैं उसकी हूँ मोहब्बत पहली मुझे यक़ीं है
वो याद उम्र-भर रक्खेगा ये बोसा मेरा

  - Harsh saxena

Hijrat Shayari

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