abhii to dil men hai jo kuchh bayaan karna hai | अभी तो दिल में है जो कुछ बयान करना है

  - Iftikhar Naseem

अभी तो दिल में है जो कुछ बयान करना है
ये बाद में सही किस बात से मुकरना है

तू मेरे साथ कहाँ तक चलेगा मेरे ग़ज़ाल
मैं रास्ता हूँ मुझे शहरस गुज़रना है

कनार-ए-आब मैं कब तक गिनूँगा लहरों को
है शाम सर पे मुझे पार भी उतरना है

अभी तो मैं ने हवाओं में रंग भरने हैं
अभी तो मैं ने उफ़ुक़ दर उफ़ुक़ बिखरना है

दिलेर हैं कि अभी दोस्तों में बैठे हैं
घरों को जाते हुए साए से भी डरना है

मैं मुंतज़िर हूँ किसी हाथ का बनाया हुआ
कि उस ने मुझ में अभी और रंग भरना है

हज़ार सदियों की रौंदी हुई ज़मीं है 'नसीम'
नहीं हूँ मैं कि जिसे पहला पाँव धरना है

  - Iftikhar Naseem

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