चाहतों का सिलसिला है मुस्तक़िल

सब्ज़ मौसम कर्ब का है मुस्तक़िल

क्या बताऊँ दिल में किस की याद का
एक काँटा चुभ रहा है मुस्तक़िल

बढ़ रहा है मुस्तक़िल क़हत-ए-शजर
ज़हर-आलूदा फ़ज़ा है मुस्तक़िल

राह-ए-उल्फ़त में कहाँ आसानियाँ
पुर-ख़तर ये रास्ता है मुस्तक़िल

आ गई है फ़स्ल-ए-आज़ादी मगर
ख़ौफ़ का पौदा हरा है मुस्तक़िल

दुश्मनी के सब दरीचे बंद हैं
दोस्ती का दर खुला है मुस्तक़िल
इश्क़ के इक टिमटिमाते दीप ने
दिल को रौशन कर रखा है मुस्तक़िल

एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न
मीठा मीठा दर्द सा है मुस्तक़िल

ज़ेहन ओ दिल की वादी-ए-पुर-अम्न में
गूँजती किस की सदा है मुस्तक़िल

देख कर रस्म-ए-वफ़ा इस दौर की
शर्मगीं हर्फ़-ए-वफ़ा है मुस्तक़िल

ग़म किसी का हो गया 'राग़िब' नसीब
वर्ना इस दुनिया में क्या है मुस्तक़िल

— Iftikhar Raghib

More by Iftikhar Raghib

Other ghazal from the same pen

See all from Iftikhar Raghib →

Beqarari Shayari Collection

Shers of beqarari shayari collection.

All Beqarari Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling