sadaa aañsu bahaane se kisi ko kuchh nahin milta | सदा आँसू बहाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

  - Iftikhar Raghib

सदा आँसू बहाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
कि रोने गिड़गिड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

किसी का कुछ नहीं जाता किसी से हँस के मिलने से
अजी यूँँ मुँह बनाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

अगर ग़ैरत है ज़िंदा तो वसाइल कीजिए पैदा
हमेशा दुम हिलाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

न हो तदबीर तो तक़दीर भी हामी नहीं होती
ख़ुदा के कार-ख़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

दरख़्तों पर इन्हें 'राग़िब' हमेशा चहचहाने दो
परिंदों को उड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

  - Iftikhar Raghib

Aansoo Shayari

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