सदा आँसू बहाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
कि रोने गिड़गिड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
किसी का कुछ नहीं जाता किसी से हँस के मिलने से
अजी यूँँ मुँह बनाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
अगर ग़ैरत है ज़िंदा तो वसाइल कीजिए पैदा
हमेशा दुम हिलाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
न हो तदबीर तो तक़दीर भी हामी नहीं होती
ख़ुदा के कार-ख़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
दरख़्तों पर इन्हें 'राग़िब' हमेशा चहचहाने दो
परिंदों को उड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Iftikhar Raghib
our suggestion based on Iftikhar Raghib
As you were reading Aansoo Shayari Shayari