आदमी कार-बार करता है
मौत का इंतिज़ार करता है
हर घड़ी हादसात का डर ही
आप को होशियार करता है
ख़्वाब दिलकश हसीन यादों पर
आदमी जाँ निसार करता है
हाँ नहीं तुम से प्यार फिर तेरा
ज़िक्र क्यूँ बे-क़रार करता है
वो यहाँ अब नहीं रहा करता
अब कहाँ पर बहार करता है
— Taufique Habib















