ये फ़सादात का ज़माना हैदिल हिदायात पर लगाना हैहो ख़सारा अगर मुझे इसमेंतो बहाना नहीं बनाना हैफिर ख़यालात पर नहीं क़ाबूइस क़दर रात शाइराना है— Taufique Habib