कैफ़ियत ऐसी है कोई मेहरबाँ मेरा नहीं
मैं अकेला हूँ यहाँ कोई यहाँ मेरा नहीं
आने वालों में न देखो आए कितने तुम तलक
लौटते क़दमों में देखो इक निशाँ मेरा नहीं
दिल मेरा क़दमों-तले रखती हो क्यूँ तुम जान-ए-जाँ
दिल मेरा मासूम है दिल सख़्त-जाँ मेरा नहीं
हाल-अहवाल उस का पूछो मत ग़ज़ल के दरमियाँ
हम-नशीं तो है वो लेकिन हम-ज़बाँ मेरा नहीं
मुझ से मेरे दिल की अब बनती नहीं है दोस्तो
मैं यहाँ मौजूद हूँ पर दिल यहाँ मेरा नहीं
— 'June' Sahab Barelvi















