"बे-असर हिज्र"

यार तेरे जाने से
कुछ नहीं बदला
ये झूठ नहीं है
सचमुच नहीं बदला

हाँ आज भी वही
अदाएँ हैं मेरी
वही लहजा है
वही सदाएँ हैं मेरी

कभी मैं ने ख़ुद पर ग़म
तारी न किया
तेरी बे-रुख़ी को कहीं
जारी ना किया

हर बात पर मुस्कुराने की
आदत न गई
तेरे ख़ातिर रातों की
इबादत न गई

बा'द तेरे जाने के
कई ख़्वाब सजाए हैं
तू नहीं तो तेरी
यादों को शे'र सुनाए हैं

बस यही बताना था
कि कुछ नहीं बदला
ये झूठ नहीं है
सचमुच नहीं बदला

— "Nadeem khan' Kaavish"

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